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जैनियों के खाने योग्य फल एवं साग भाजी

08 Dec

फल :-
आम, अनार, आडू, अनानास, अमरुद, आंवला, अलूचा, अंगूर, बेर, बेलगिरि, सेव, संतरा, सिंघाड़ा, शरीफा, केला, ककड़ी, कमरख, खरबूजा, खीरा, गन्ना, ईख, गोला, नारियल, मौसमी, मालटा, लोकाट, चेरी, चीकू, जामुन, तरबूज, नासपाती, नाक, नीम्बू, पपीता, नारंगी |

साग भाजी :-
मेथी, गवारफली, फूट, करौन्दा, टींट, इमली, घिया, तोरी, टिण्डा, भिण्डी, सीताफल (पेठा), लोभिया, सरसों का साग, चने का साग, पेठा (मिठाईवाला), धनिया, पुदीना, गोभी-पत्ता, लेहसवा, लिसौड़े, फासबीन, सेम, टमाटर, पालक, मिर्च, सोयाबीन, करेला, कचरी, मोंगरी, बथुआ, परमल, मटर, मकई,  भुट्टा |

नोट :- इलाज में काम आने वाले फल आदि के रस को छोड़कर कुछ फलों व साग भाजी की कुछ समय अवधि निश्चत कर कुछ संख्या का नियम कर लेना चाहिए |

 

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  1. Jyotindra Jetha bhai Zaveri

    May 29, 2012 at 2:30 am

    Good and useful information, appreciated.

     
  2. jigar6278igar Shah

    July 29, 2012 at 8:38 pm

    Jai Jinendra, thanks

     
  3. Vaibhav Jain

    July 30, 2012 at 5:05 pm

    Our jain religion is the best and ranks no 1 in the world.